Motivational Story in Hindi – इंसान की सबसे बडी दुश्मन
Motivational Story in Hindi – इंसान की सबसे बडी दुश्मन
Motivational Story in Hindi
– एक गाँव में वीरभान नाम का एक गरीब नौजवान युवक था। कम उम्र में ही उसके
पिता की मृत्यु हो गई थी जिसकी वजह से उसकी माता ने ही उसका पालन-पोषण
किया था।
जिस गांव में वह नौजवान रहता था, वह गांव
राजा जयसिंह के राज्य का हिस्सा था। राजा जयसिंह के राज्य की सीमा काफी
फैली हुई थी क्योंकि राजा जयसिंह ने अपने आस-पास के सभी छोटे-मोटे
राज्यों को जीत कर अपना एक बडा साम्राज्य स्थापित कर लिया था और वो ऐसा
इसलिए कर सका था क्योंकि उसकी सेना काफी विशाल थी और राजा जयसिंह न केवल
अपने सैनिकों का बल्कि अपनी सेना के जीवों जैसे कि हाथी, घोडे आदि का भी
बहुत ध्यान रखता था।
राजा जयसिंह के सभी हाथियों में महावीर
नाम का एक बहुत ही बलशाली हाथी था। राजा इस हाथी को बहुत पसन्द करता था
इसलिए इस हाथ्ाी का विशेष ध्यान रखा जाता था और हर रोज सुबह सवेरे इस
हाथी को सिपाहियों के साथ भ्रमण करने के लिए भेजा जाता था।
अक्सर वह हाथी भ्रमण के लिए उसी गांव से
गुजरता था, जहां वीरभान रहता था और वीरभान अक्सर अपनी ताकत की आजमाईश करने
के लिए उसी हाथी की पूंछ पकडकर उसे पांच कदम पीछे खींच लेता था। जब वीरभान
उस हाथी की पूंछ पकडकर उसे पीछे खींचता था, तो हाथी भी अपनी पूरी ताकत
लगाकर वीरभान को हराने की कोशिश करता था। लेकिन हर बार हार हाथी की ही होती
थी। ये बात हाथी को भी काफी अपमानजनक लगती थी क्योंकि राजा के सभी
जानवरों में सबसे महाबली होने के बावजूद भी वह हर बार उस नौजवान से हार
जाता था।
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हर बार हार जाने की वजह से धीरे-धीरे उस
हाथी को चिन्ता होने लगी कि जिस दिन राजा को ये बात पता चलेगी कि एक अदना
सा बालक मुझे हर रोज हरा देता है, उस दिन राजा मुझे जरूर मारने का हुक्म
दे देगा क्योंकि ऐसे कमजोर हाथी को कोई भी राजा पसन्द नहीं करेगा, जो एक
छोटे से बालक से हार जाता हो। इसी चिन्ता में वह हाथी धीरे-धीरे कमजोर
होने लगा।
महावत (हाथी को चलाने वाला व्यक्ति) यह
बात जानता था कि हाथी दिन ब दिन कमजोर क्यों होता जा रहा है, लेकिन वह कुछ
नहीं कर सकता था क्योंकि वीरभान हर बार एक चंचल बालक की तरह चुपके से
आता, हाथी को पांच कदम पीछे खींचता और खिलखिलाते हुए भाग जाता, जैसे कि
हाथी को खींचकर हरा देना उसके लिए एक मजाक के समान हो।
एक दिन राजा जयसिंह की नजर उस हाथी पर पडी जो कि काफी कमजोर अौर बीमार जैसा मालूम पड रहा था। चूंकि वह राजा का पसंदीदा हाथी था, इसलिए राजा ने तुरन्त ही उस महावत को बुलाया और पूछा-
एक दिन राजा जयसिंह की नजर उस हाथी पर पडी जो कि काफी कमजोर अौर बीमार जैसा मालूम पड रहा था। चूंकि वह राजा का पसंदीदा हाथी था, इसलिए राजा ने तुरन्त ही उस महावत को बुलाया और पूछा-
हमारे सभी पालतु जानवरों में ये हाथी
ही सबसे शक्तिशाली, हष्ट-पुष्ट था, लेकिन अब ये अब ये इतना कमजोर क्यों
दिखाई दे रहा है… तुम जानते हो ये मेरा प्रिय हाथी है, फिर भी तुमने इस
हाथी का सही तरीक से ख्याल नहीं रखा। इस अपराध की सजा जानते हो?
राजा के गुस्से से महावत घबरा गया और बोला-
महाराज… मैं तो इस हाथी का बहुत
ध्यान रखता हूँ, लेकिन जब मैं इसे घुमाने ले जाता हूँ तो गांव का एक
नौजवान बालक इस हाथी से एक अजीब सी मजाक करता है। वह चुपके से आता है और इस
हाथी को पूँछ से पकड़ लेता है और पाँच कदम पीछे खींच लेता है और जब तक
सिपाही लोग उसे पकडने के लिए उसके पास पहुंचते हैं, वह भागकर कहीं गायब हो
जाता है। इतने बडे व शक्तिशाली हाथी को एक छोटा सा बालक इस तरह से पांच कदम
पीछे खींच लेता है, बस यही बात इस हाथी की चिन्ता का कारण है, जिसकी वजह
से ये दिन-ब-दिन कमजोर होता चला जा रहा है और इसमें मेरा कोई दोष नहीं है।
महाराज का गुस्सा शांत थोडा शान्त हुआ
क्योंकि एक बच्चा किसी हाथी जैसे महाशक्तिशाली जीव को पांच कदम पीछे खींच
ले, ये बात राजा के लिए भी काफी आश्यर्चजनक थी। राजा को महावत की इस बात
विश्वास नहीं हुआ। उसे लगा कि शायद महावत अपनी गलती से बचने के लिए झूठ
बोल रहा है। इसलिए राजा ने महावत से कहा कि-
कल इस हाथी पर बग्गी सज़ा देना। मैं
भी तुम्हारे साथ चलुॅंगा और देखूंगा कि तुम सच कह रहे हो या झूठ और अगर
तुम्हारी ये बात झूठ निकली तो, कल का सूर्यास्त तुम नहीं देखोगे।
अगले दिन वह महावत राजा के साथ उस हाथी को
लेकर राज्य में घुमाते हुए उसी गाँव में पहुँचा। वीरभान को पता नही था कि
आज हाथी के साथ राजा जयसिंह भी आए हैं। इसलिए हमेशा की तरह वह चुपके से
आया और हाथी की पूँछ पकड़ कर उसे पाँच कदम पीछे खींचा और फिर से भागकर सबकी
आंखों से ओझल हो गया क्योंकि ऐसा करना उसके लिए मात्र एक प्रकार का मजाक
था।
राजा जयसिंह, वीरभान के इस करतब से
प्रसन्न तो बहुत हुए और उन्हें ये भी पता चल गया कि महावत झूठ नहीं बोल
रहा है, लेकिन राजा के सबसे बलशाली हाथी को कोई बालक 5 कदम पीछे खींच ले,
ये बात राजा के सम्मान पर एक प्रकार के कलंक के समान थी, जिसे राजा कतई
बर्दाश्त नहीं कर सकता था।
अब बात ये नहीं थी कि उसके राज्य में
सबसे बलशाली हाथी से भी अधिक बलशाली एक व्यक्ति है बल्कि अब बात राजा के
अहंकार की थी और उसे ये साबित करना था कि राजा का हाथी ही सबसे अधिक बलशाली
है, और राजा की विशाल व शक्तिशाली सेना के कारण ही उसका राज्य व उसके
राज्य में रहने वाली प्रजा सुरक्षित है।
अत: जिस प्रकार से उस नौजवान बालक ने
प्रजा के सामने राजा के हाथी को हराया है, ठीक उसी तरह से उसी प्रजा के
सामने हाथी को जिताना व उस नौजवान को हराना जरूरी था, ताकि प्रजा में राजा
के प्रति विश्वास कायम हो सके।
अगले दिन राजा ने अपने सिपाहियों से उस
नौजवान बालक के बारे में पता लगाने को कहा। सिपाहियों ने पता लगाकर राजा
को बताया कि वह नौजवान अपनी मां के साथ रहता है, काफी गरीब है, कभी-कभी तो
दो समय के खाने का भी पता-ठिकाना नहीं होता और उसकी मां ही उसके खाने-पीने
का इन्तजाम करती है। होने उस लड़के के पिता को बुलाया तो पता चला की उसके
पिता तो अब इस दुनिया में नही है तो उस बालक की माता को बुलाया गया।
राजा जयसिंह बहुत ही चतुर व्यक्ति थे और
अपने हाथी को जितवाने के लिए उन्होंने एक ऊपाय सोंच लिया था। उन्होंने
सिपाहियों से वीरभान की माता को राजदरबार में हाजिर होने का हुक्म भेजा।
राजा के बुलावे पर वीरभान की मां राजदरबार में हाजिर हुई तो राजा ने उससे
पूछा:
तुम अपने पुत्र को क्या खिलाती हो जो वह हमारे सबसे शक्तिशाली हाथी को भी पांच कदम पीछे खींच लेता है?
वीरभान की मां को लगा कि उसके पुत्र ने बहुत बडी गलती कर दी है, इसलिए उसने डरते-डरते जवाब दिया-
महाराज… मैं बहुत गरीब हूं … लोगों के
यहां काम करके जितनी भी कमाई हो पाती है, उससे दो वक्त की गेहूं की
रोटियां भी नसीब नहीं हो सकतीं। इसलिए मैं अपने पुत्र को नमक के साथ बाजरे
की रोटी ही खिला पाती हुं…
यदि मेरे पुत्र ने ऐसी कोई गलती की
है, तो हमें क्षमा करें महाराज … आज के बाद मेरा पुत्र आपके हाथी या किसी
भी अन्य जीव के आस-पास भी नहीं जाएगा… हम इस गांव को छोडकर कहीं दूर चले
जाऐंगे …
राजा जयसिंह को अन्दाजा हो गया कि वीरभान की मां डर गई है, इसलिए उसने कहा-
डरने की या गांव छोडकर जाने की कोई
जरूरत नहीं है… और आगे से तुम्हें कहीं पर भी काम करने जाने की जरूरत भी
नहीं है … आज से तुम्हारे घर का सारा खर्चा राज्य के खजाने से पूरा किया
जाएगा … तुम्हारे बलवान पुत्र को हमारी सेना में उच्च पद भी दिया जाएगा …
लेकिन इसके बदले में तुम्हें एक छोटा सा काम करना पडेगा।
राजा से इस व्यवहार की उम्मीद नहीं थी वीरभान की मां को इसलिए खुश होकर उसने कहा-
महाराज … आप जो हुक्म करेंगे, वैसा ही होगा।
राजा ने कहा कि- कल जब तुम अपने पुत्र
को भोजन परसो, तब उसे बाजरे की रोटी के साथ नमक मत देना… जब तुम्हारा
पुत्र नमक मांगे, तो उससे कह देना कि “नमक का भाव बढ गया है लेकिन
मेरी कमाई उतनी ही है जितनी पहले थी … इसलिए कल से रोटी मैं कमाऊंगी और नमक
तुम्हे कमाना होगा …”
वीरभान की माँ राजा के बात की गूढता को
नहीं समझी और उसने वैसा ही किया जैसा राजा ने कहा था। उसने अपने पुत्र को
बाजरे की रोटी तो दी लेकिन नमक नहीं दिया और जब वीरभान ने नमक मांगा, तो
उसकी मां ने वही बात दोहरा दी जो राजा ने कही थी कि-
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नमक का भाव काफी बढ गया है लेकिन
मेरी कमाई उतनी ही है जितनी पहले थी … इसलिए नमक और रोटी दोनों कमाना अब
अकेले मेरे बस की बात नहीं है… इसलिए कल से रोटी मैं कमाऊंगी और नमक
तुम्हे कमाना होगा …
वीरभान ने कभी काम किया नहीं था और उसे
कुछ आता-जाता भी नहीं थी। इसलिए अब उसे चिन्ता सताने लगी कि माँ तो रोटी
कमा लेगी क्योंकि रोज कमाती है, लेकिन मैं नमक कैसे कमाऊंगा… कहां से
कमाऊंगा…
इसी प्रकार की चिन्ता व उधेडबुन में उसकी
पूरी रात जागते-जागते ही कट गई। अगले दिन राजा जयसिंह फिर उसी हाथी की
बग्गी में सवार होकर… उसी गांव से निकले और वीरभान ने फिर से हाथी की पूंछ
पकडकर उसे पीछे खींचने की कोशिश की… लेकिन आज वो हाथी को रोक तक न सका
बल्कि हाथी उसे खींचता हुआ लेकर चला गया।
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इस कहानी का Moral ये है कि चिन्ता, इंसान की सबसे बडी दुश्मन
है जो उसकी सारी शक्ति, सारी क्षमताओं को खा जाती है। हालांकि राजा ने
जैसाकि वीरभान की मां से वादा किया था, उसका सारा खर्चा उठाया, वीरभान को
सेना में ऊंचा पद भी दिया, लेकिन उस दिन के बाद वीरभान कभी भी किसी भी हाथी
को उसकी पूंछ पकडकर पीछे नहीं खींच पाया क्योंकि वीरभान ने अनजाने में ही
चिंता करना सीख लिया था।
अत: यदि आपको भी किसी विषय में किसी भी
प्रकार की चिन्ता है, तो चिन्ता छोडिए और इस बात का चिन्तन कीजिए कि उस
चिन्ता से छुटकारा कैसे पाया जाए क्योंकि चिन्ता एक दीमग की तरह है, जो
आपको अन्दर ही अन्दर खाकर खोखला कर देती है।
यदि ये छोटी सी Moral Story आपको अच्छी
लगी हो, तो इसे अपने मित्रों के साथ Share कीजिए और Comment करके हमें
बताईए कि आपने इस कहानी से क्या सीखा और आपको ये कहानी कैसी लगी। आपके
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